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साहित्य सरताज: नववर्ष का आरंभ रचनात्मकता के साथ

Posted On: 27 Dec, 2013 Contest में

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प्रिय पाठकों,


शब्दों की दुनिया एक ऐसी दुनिया है जो भावनाओं को अभिव्यक्ति देकर एक समाज का निर्माण करती है। भाषा कोई भी हो लेकिन इसके शब्द और शब्दों का प्रयोग ही अभिव्यक्ति को सार्थक करता है। इसलिए भाषा के साथ रचनात्मकता का बहुत महत्व है। शब्दों की इस रचनात्मक दुनिया में अभिव्यक्ति की अनेक विधाएं हैं और इस रचनात्मक अभिव्यक्ति के द्वारा भाषा का रचनात्मक संसार ‘साहित्य’ का निर्माण होता है। हर भाषा का अपना साहित्य है और इस साहित्य में सृजनात्मकता की अपार संभावनाएं हैं। सामान्य विवेचना आलेख, कहानी, लघु कथा, धारावाहिक कथा, उपन्यास, शायरी, संस्मरण, आलोचना, टिप्पणी आदि अनेक विधाओं से साहित्य संपूर्ण होता है। नववर्ष के उपलक्ष्य में जागरण जंक्शन मंच आपकी साहित्य क्षुधा को एक नया आयाम देते हुए आपकी रचनात्मकता को एक उल्लेखनीय स्थान देने के लिए प्रतिबद्ध होते हुए ‘साहित्य सरताज’ प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है।


जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ‘साहित्य सरताज’ साहित्य से जुड़ा होगा। किंतु साहित्य की हर विधा में हर कोई पारंगत नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ के अंतर्गत हम पाठकों से निम्न श्रेणियों में प्रविष्टियां आमंत्रित करते हैं:


(i) कविता – (Poems)

(ii) लघु कहानी(Short stories) – (300-400 words)

(iii) शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)

(iv) संस्मरण – (Reminiscence)

(v) आलोचना – (Critique) – निम्न तीन आलोचना वर्ग के अंतर्गत यूजर अपनी रचनाएं शामिल कर सकते हैं:

-साहित्यिक

-राजनीतिक

-सामाजिक


नोट: किंतु किसी भी प्रकार के धार्मिक, सामाजिक, भाषाई, जातिगत, व्यक्तिगत भावनाओं को आहत करने वाले व अभद्र शैली के आलेख मान्य नहीं होंगे।


प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पाठकगण उपर्युक्त पांच श्रेणियों में से किसी एक या कई श्रेणियों में अपनी प्रविष्टियां देकर प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं।


नियम एवं शर्तें


अवधि: 1 जनवरी – 31 जनवरी 2014


अर्हता: जागरण जंक्शन रीडर सेक्शन के सभी वर्तमान सदस्य इस प्रतियोगिता के लिए पात्र हैं।


प्रविष्टियां: प्रतियोगिता की अवधि में उपर्युक्त में किसी भी विधा में प्रविष्टियां देने के लिए यूजर स्वतंत्र हैं। एक से अधिक विधाओं में भी ब्लॉग पोस्ट डाले जा सकते हैं और आप जिस भी विधा में चाहें एक से अधिक कितनी भी प्रविष्टियां शामिल कर सकते हैं।


नोट: केवल प्रतियोगिता की अवधि के दौरान प्रकाशित रचनाएं/प्रविष्टियां ही मान्य होंगी। यदि कोई प्रतियोगी किसी पूर्व प्रकाशित रचना को प्रतियोगिता में शामिल करना चाहता है तो इसके लिए यूजर को पूर्व में प्रकाशित उस रचना का लिंक ज्यों-की-त्यों पेस्ट करने की बजाय उसे दुबारा प्रकाशित कर उसके लिंक को शामिल करना होगा। अन्यथा रचनाएं स्वयं ही प्रतियोगिता से बाहर समझी जाएंगी।


शब्द सीमा: केवल लघु कहानी के लिए 300-400 शब्दों की शब्द सीमा मान्य होगी। अन्य विधाओं के लिए कोई शब्द सीमा नहीं रखी गई है।


भाषा: हर विधा के लिए केवल हिंदी भाषा में प्राप्त प्रविष्टियां ही मान्य होंगी।


*ब्लॉग पोस्ट नियम:

-ब्लॉग प्रकाशित करते हुए कैटगरी में Contest सेलेक्ट करें या शीर्षक में हिंदी या अंग्रेजी में Contest/कॉंटेस्ट जरूर लिखें।


-प्रतियोगिता के लिए प्रकाशित ब्लॉग (प्रविष्टि) पोस्ट का लिंक इस आमंत्रण ब्लॉग के रिप्लाई कॉलम में जाकर ‘शीर्षक के साथ’ टिप्पणी स्वरूप अवश्य पोस्ट कर दें। टिप्पणी शीर्षक के रूप में आपकी पोस्ट की विधा का नाम होगा। उदाहरणार्थ: अगर आपकी प्रविष्टि ‘लघु कथा’ के अंतर्गत है तो वह निम्न रूप में प्रस्तुत की जाएगी:

लघु कथा – प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) लिंक


चयन पद्धति: हर विधा के लिए तीन विजेता चुने जाएंगे (अर्थात सभी 5 विधाओं को मिलाकर कुल 15 ‘साहित्य सरताज 2014’ चुने जाएंगे। उपर्युक्त विधाओं के अंतर्गत प्राप्त प्रविष्टियों (ब्लॉग पोस्ट्स) का संपादक मंडल की अनुशंसा, अन्य ब्लॉगरों से प्राप्त सार्थक टिप्पणियों की संख्या तथा उनको मिले यूजर रेटिंग के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।


*विशेष सम्मान

हर विधा से जिन 3 विजेता ‘साहित्य सरताज’ का चुनाव संपादक मंडल के द्वारा किया जाएगा उन्हें विशेष सम्मान स्वरूप उनकी तस्वीर के साथ जंक्शन मंच पर विशेष स्थान दिया जाएगाइसके अंतर्गत इन विजेताओं के ब्लॉग ‘होम पेज’ पर दाहिनी ओर सबसे ऊपर (नीले रंग का बॉक्स कॉलम जहां आज का मुद्दा’; ‘माया Says’; नई शुरू हुई ‘फोटो गैलरी’ आदि पब्लिश किए जाते हैं) सात दिनों तक प्रकाशित किए जाएंगे जहां सिर्फ जागरण समूह के आलेख ही प्रकाशित किए जाते हैं।


अन्य:

-इस प्रतियोगिता में भारत समेत पूरे विश्व के प्रतियोगी हिस्सा ले सकते हैं।

-प्रतियोगिता की अवधि के दौरान पंजीकृत नए यूजर भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

-अभद्र, अश्लील, सामुदायिक, धार्मिक भावना को आहत करने वाले तथा व्यक्तिगत टिप्पणी या लांछन वाले ब्लॉग पोस्टस् को प्रतियोगिता के लिए अयोग्य समझा जाएगा।

-प्रतियोगिता के संबंध में किसी भी तरह के विवाद के लिए न्यायिक क्षेत्र ‘दिल्ली’ होगी.

-इस संदर्भ में किसी भी प्रकार की समस्या/अन्य स्पष्टीकरण के लिए आप feedback@jagranjunction.com पर मेल कर सकते हैं।


नोट: प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए आपको अलग से आवेदन करने या ब्लॉग बनाने की आवश्यकता नहीं है। जागरण जंक्शन पर पंजीकृत रीडर सेक्शन का कोई भी यूजर इसमें भागीदारी कर सकता है।


फिर देर किस बात की ! साहित्य सरताज’ में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज़ कराकर नए साल में एक रचनात्मक शुरुआत करें!!


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार



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509 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

narayanimaya के द्वारा
January 31, 2014
mrssarojsingh के द्वारा
January 31, 2014

लघु कथा –उसने पतंग पर लिख कर भेजी अपनी दुआएं ..(कांटेस्ट) http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/31/697366/

ranjanagupta के द्वारा
January 31, 2014
    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    January 31, 2014

    आलोचना ,भयंकर साहित्य सरताज अंतरिक्ष ,प्रविष्टि 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 31, 2014

मेरा अटल ,संकल्प . विकल्प ,contest , http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/02/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%9F%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA/

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 31, 2014

http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/31/रिश्तों के मौजों की गई रबानी परदेशी कविता – ( कांटेस्ट )

January 31, 2014

कविता-(गुब्बारा लोकतंत्र का टोपी युग) http://pardaa.jagranjunction.com/2014/01/31/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%AA/

rekhafbd के द्वारा
January 31, 2014
rekhafbd के द्वारा
January 31, 2014

पूर्व प्रकाशित रचना नही बदली मानसिकता-कविता [CONTEST ] http://rekhafbd.jagranjunction.com/2013/12/16/%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

rekhafbd के द्वारा
January 31, 2014

पूर्ण हो कामनाएँ-कविता -Contest http://rekhafbd.jagranjunction.com/?p=६९७१४१

    rekhafbd के द्वारा
    January 31, 2014

    क्षमा प्रार्थी हूँ यह ठीक से पोस्ट नही हुआ

rekhafbd के द्वारा
January 31, 2014

आह– [कविता ]contest आह– [कविता ]contest http://rekhafbd.jagranjunction.com/2012/03/10/%E0%A4%86%E0%A4%B9/

rekhafbd के द्वारा
January 31, 2014

आह– [कविता ]contest पूर्व प्रकाशित याचना http://rekhafbd.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=21

    rekhafbd के द्वारा
    January 31, 2014

    सॉरी गलती से यह लिंक एडिट का का पोस्ट हो गया ,क्ष्मा प्रार्थी हूँ

saritabhatia के द्वारा
January 31, 2014
saritabhatia के द्वारा
January 31, 2014
Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 31, 2014

मत सहेजो –कविता कांटेस्ट - द्वारा –निर्मला सिंह गौर gaurnirmalasingh.jagranjunction.com

Dr Shobha Bharadwaj के द्वारा
January 31, 2014
PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 31, 2014

आलोचना , भयंकर साहित्य सरताजअंतरिक्ष ,cotest   http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/27/%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A4/

Charchit Chittransh के द्वारा
January 31, 2014

आलोचना – सामाजिक – “वास्तविक आज़ादी की ओर …”(कान्टेस्ट) — http://swasasan.jagranjunction.com/?p=695782

mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014

संस्मरण —जितने रंग साड़ी में उतने ही रंगों की चूड़ियाँ कलाई में .. http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/30/%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80/

mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014

शेरो -शायरी /ग़ज़ल —बचा ही लेंगे हर कश्ती को साहिल यह जरूरी तो नहीं http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/30/%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8/

narayanimaya के द्वारा
January 30, 2014
    narayanimaya के द्वारा
    January 30, 2014

    कविता - http://narayani.jagranjunction.com/2014/01/30/bhookh-contest/

Ritu Gupta के द्वारा
January 30, 2014
yamunapathak के द्वारा
January 30, 2014
DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 30, 2014
कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र के द्वारा
January 30, 2014

लघुकथा – भूख और बेबसी – http://spandan.jagranjunction.com/?p=696515

nyarisharma के द्वारा
January 30, 2014

कविता-नव संस्कार

mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014

हर अहसास को रुह की दीवारों से आज़ाद कर दिया /हमने तो खुद को परों सा हल्का कर लिया http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/30/%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82/

mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014

संस्मरण –चमन है यह वो /जाने कितने ही /कवियों,शेरो,लेखकों की/रूहें जहाँ बेदार होती हैं / http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/29/%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%B5%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%95/

mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014
mrssarojsingh के द्वारा
January 30, 2014
भटका लड़का के द्वारा
January 30, 2014

कविता- अंतिम संदेश http://theexplorer.jagranjunction.com/2014/01/30/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 29, 2014
Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 29, 2014

दो छांदस कविताएँ, कविता – ( कांटेस्ट ) http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/29/दो-छांदस-कविताएँ/

yamunapathak के द्वारा
January 29, 2014

आलोचना (सामाजिक) कांटेस्ट सामाजिक संरचना में “शिक्षा का मूल्य(प्राइस टैग) और मूल्य परक (वैल्यूबेस्ड )शिक्षा” http://yamunapathak.jagranjunction.com/2014/01/29/%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B8-%E0%A4%9F%E0%A5%88/

drarvindkumarsingh के द्वारा
January 29, 2014

राजनीतिक-http://drarvindkumarsingh.jagranjunction.com/2014/01/29/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%9c/

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 29, 2014

आलोचना ,यमला पगला दीवाना ,लक्ष्य ना छोडना प्रविष्टि,http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/22/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4/

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 29, 2014

आलोचना, प्रविष्टी ,चीसीना को बिरालो ,जय हो ,गणतंत्र दिवस ,http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/22/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4/

    Santlal Karun के द्वारा
    January 30, 2014

    जेजे से निवेदन– महोदय, इस लिंक को हटाने की कृपा करें |

    Santlal Karun के द्वारा
    January 30, 2014

    जेजे से निवेदन– महोदय, इस लिंक को हटाने की कृपा करें |

    Santlal Karun के द्वारा
    January 30, 2014

    जेजे से विनम्र निवेदन– महोदय, इस लिंक को हटाने की कृपा करें |

    Santlal Karun के द्वारा
    January 30, 2014

    निवेदन जेजे से–  महोदय, इस लिंक को हटाने की कृपा करें |

rekhafbd के द्वारा
January 29, 2014

अलादीन का जादुई चिराग–Contest http://rekhafbd.jagranjunction.com/2012/04/28/aladin-ka-chmktkaari-jinn/

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 29, 2014

चिडिया फूर्र ,शेर दहाडता रह अकेला,http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/12/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%B5/

    parveen sharma के द्वारा
    January 29, 2014

    (लघुकथा)-साम्प्रदायिकता -कांटेस्ट-http://parveensharma.jagranjunction.com/

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 29, 2014

आलोचना,मैं ही हरिश्र्चंद्रवतार ,अरविन्द्र केजरीवाल http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/12/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%B5/

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 29, 2014

आलोचना ,मेरा अटल संकल्प विकल्प ,http://hcsharma.jagranjunction.com/2014/01/02/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%9F%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA/

jlsingh के द्वारा
January 29, 2014

२६ जनवरी २०१४ कांटेस्ट के लिए लिंक कर रहा हूँ. http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/27/%E0%A5%A8%E0%A5%AC-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%AA/

jlsingh के द्वारा
January 29, 2014

कविता ‘सृष्टि का श्रृंगार कैसा !’ प्रतियोगिता के लिए यहाँ लिक्क कर रहा हूँ. http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/29/%E0%A4%B8%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%83%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE/

mrssarojsingh के द्वारा
January 29, 2014
Himanshu Bhatt के द्वारा
January 29, 2014

शेर ओ शायरी-http://himanshubhatt.jagranjunction.com/2014/01/29/contest-फितरत-ए-इंसान-इंसानियत-क/(CONTEST)

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 28, 2014

एक टुकड़ा बादलों का -ग़ज़ल –कांटेस्ट ,द्वारा, निर्मला सिंह गौर gaurnirmalasingh.jagranjunction.com

seema sachdeva के द्वारा
January 28, 2014
AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
January 28, 2014
AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
January 28, 2014

प्रविष्टि : संस्मरण ………….जब चाचा फूल बने! (Contest) http://sajay.jagranjunction.com/2014/01/28/%E0%A4%9C%E0%A4%AC-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87-2/

AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
January 28, 2014

प्रविष्टि : आलोचना (सामाजिक) …………. हाँफते शहर … (Contest) http://sajay.jagranjunction.com/2014/01/28/%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%AB%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0-contest/

AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
January 28, 2014

कविता – प्रविष्टि ………. सुब्ह की आस कर …. (Contest) http://sajay.jagranjunction.com/2014/01/18/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-contest/

AMAR LATA के द्वारा
January 28, 2014
AMAR LATA के द्वारा
January 28, 2014
ranjanagupta के द्वारा
January 28, 2014
ranjanagupta के द्वारा
January 28, 2014

कामकाजी महिला !! एक विमर्श ! आलोचना !!

Abid ali mansoori के द्वारा
January 28, 2014

आओ उल्फ़त की आबिद हम शम्मोँ को जला देते हैँ! http://abidalimansoori.jagranjunction.com/2014/01/28/695371/

mrssarojsingh के द्वारा
January 28, 2014
mrssarojsingh के द्वारा
January 28, 2014

कविता —आसमान छूने को उठे थे जो हाथ -(कांटेस्ट) ahttp://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/16/%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%9B%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%A5%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5/

mrssarojsingh के द्वारा
January 28, 2014

कविता –गीत कोई गाने का मन है आज -http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/22/%E0%A4%97%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%86%E0%A4%9C/

mrssarojsingh के द्वारा
January 28, 2014
mrssarojsingh के द्वारा
January 28, 2014

क्यूँ न हम अपने बगीचे में मटर पनीर का पेड़ उगा लें ,,,संस्मरण (कांटेस्ट) http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/24/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%81-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%AE-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A5%80%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE/

mrssaroj singh के द्वारा
January 28, 2014

रामचरितमानस -समन्वय का सिधु -आज के सन्दर्भ में …साहित्यिक आलोचना .(कांटेस्ट) http://mrssarojsingh.jagranjunction.com/2014/01/28/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF/

parveen dutt sharma के द्वारा
January 28, 2014

(लघुकथा)-प्रेम कहानी-कांटेस्टhttp://parveensharma.jagranjunction.com/2014/01/28/प्रेम-कहानी-contest/

कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र के द्वारा
January 28, 2014

लघुकथा – भूख – http://spandan.jagranjunction.com/?p=695375

parveen dutt sharma के द्वारा
January 28, 2014

प्रेम कहानी (लघुकथा)-कांटेस्ट http://parveensharma.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
January 28, 2014

क्या होगा आपका …? गलतियां तो हुई है …. कांटेस्ट के लिए लिंक कर रहा हूँ… http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/27/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B/

jlsingh के द्वारा
January 28, 2014

‘उठो केजरीवाल’ कविता कांटेस्ट के लिए यहाँ लिंक कर रहा हूँ http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/21/%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2-contest/

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 27, 2014

दांव पर लग गई आजतक की उमर , कविता – ( कांटेस्ट ) http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/27/दांव-पर-लग-गई-आजतक-की-उमर/

yamunapathak के द्वारा
January 27, 2014
yamunapathak के द्वारा
January 27, 2014
Abid ali mansoori के द्वारा
January 27, 2014

क्या मैँ आकाश नहीँ छू सकती? http://abidalimansoori.jagranjunction.com/2014/01/27/694840/

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
January 27, 2014

कविता – पहचान के साथ ही – http://spandan.jagranjunction.com/?p=694925

vivanrana के द्वारा
January 27, 2014

कविता- सुनता है सबकी तू मगर करता है अपनी ए खुदा|  http://vivanrana.jagranjunction.com/

rekhafbd के द्वारा
January 27, 2014
rekhafbd के द्वारा
January 27, 2014
rekhafbd के द्वारा
January 27, 2014

तार तार हुआ माँ का आंचल -मदर्स डे पर [Contest ] http://rekhafbd.jagranjunction.com/2012/05/06/%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0-hua-maa-ka-aanchl/

Sonam Saini के द्वारा
January 27, 2014

कविता——बंद आँखों से भी न जाने कैसे ———-http://sainisoni.jagranjunction.com/2014/01/27/%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%86%E0%A4%81%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E2%80%A6%E2%80%A6/

rani के द्वारा
January 27, 2014

तू धरती पर ख़ुदा है माँ ! तू सवेरा ज़ुदा है माँ ! पंछी को छाया देते पेड़ों की डाली है तू सूरज से रौशन होते चेहरे की लाली है तू पौधों को जीवन देती मिट्टी की क्यारी है तू सबसे अलग सबसे ज़ुदा माँ सबसे न्यारी है तू तू रौशनी का ख़ुदा है माँ ! तू सवेरा ज़ुदा है माँ ! सूरज से तपते आँगन में बारिश की बौछार है तू जीवन के सूने उपवन में कलियों की बहार है तू खतरों से रक्षा करती सदा खड़ी दीवार है तू ईश्वर का सबसे प्यारा और सुन्दर अवतार है तू तू फरिश्तों की दुआ है माँ ! तू सवेरा ज़ुदा है माँ !

rani के द्वारा
January 27, 2014

हिंदी मेरा इमान है हिंदी मेरी पहचान है हिंदी हूँ मैं वतन भी मेरा प्यारा हिन्दुस्तान है *************** हिंदी की बिन्दी को मस्तक पे सजा के रखना है सर आँखो पे बिठाएँगे यह भारत माँ का गहना है ************** बढ़े चलो हिंदी की डगर हो अकेले फिर भी मगर मार्ग की काँटे भी देखना फूल बन जाएँगे पथ पर ******************** हिंदी को आगे बढ़ाना है उन्नति की राह ले जाना है केवल इक दिन ही नहीं हमने नित हिंदी दिवस मनाना है ********************** हिंदी से हिन्दुस्तान है तभी तो यह देश महान है निज भाषा की उन्नति के लिए अपना सब कुछ कुर्बान है ***************** निज भाषा का नहीं गर्व जिसे क्या प्रेम देश से होगा उसे वही वीर देश का प्यारा है हिंदी ही जिसका नारा है ******************* राष्ट्र की पहचान है जो भाषाओं में महान है जो जो सरल सहज समझी जाए उस हिंदी को सम्मान दो ************** अंग्रेजी का प्रसार भले हम अपनी भाषा भूल चले तिरस्कार माँ भाषा का जिसकी ही गोदि में हैं पले ****************** भाषा नहीं होती बुरी कोई क्यों हमने मर्यादा खोई क्यों जागृति के नाम पर हमने स्व-भाषा ही डुबोई ******************* अच्छा बहु भाषा का ज्ञान इससे ही बनते है महान सीखो जी भर भाषा अनेक पर राष्ट्र भाषा न भूलो एक ***************** इक दिन ऐसा भी आएगा हिंदी परचम लहराएगा इस राष्ट्र भाषा का हर ज्ञाता भारतवासी कहलाएगा ************** निज भाषा का ज्ञान ही उन्नति का आधार है बिन निज भाषा ज्ञान के नहीं होता सद-व्यवहार है ****************** आओ हम हिंदी अपनाएँ गैरों को परिचय करवाएँ हिंदी वैज्ञानिक भाषा है यह बात सभी को समझाएँ ******************** नहीं छोड़ो अपना मूल कभी होगी अपनी भी उन्नति तभी सच्च में ज्ञानी कहलाओगे अपनाओगे निज भाषा जभी ****************** हिंदी ही हिन्द का नारा है प्रवाहित हिंदी धारा है लाखों बाधाएँ हो फिर भी नहीं रुकना काम हमारा है *************** हम हिंदी ही अपनाएँगे इसको ऊँचा ले जाएँगे हिंदी भारत की भाषा है हम दुनिया को दिखाएँगे

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
January 27, 2014

लघुकथा – प्रेम का स्वरूप – http://spandan.jagranjunction.com/?p=694633

Ajay Chaudhary के द्वारा
January 27, 2014
Charchit Chittransh के द्वारा
January 27, 2014

कविता- हर प्रश्न पर क्यों प्रश्नचिन्ह??? -कान्टेस्ट  http://swasasan.jagranjunction.com/?p=691611 अगर यह कविता फीचर के भी योग्य नहीं … तो हिंदी साहित्य के भविष्य को सुरक्षित करने पारखियों को  स्तरीय परख के प्रशिक्षण की आवश्यकता है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 26, 2014

कविता कांटेस्ट —अगर हो जाएँ आँखे नम …..गणतंत्र दिवस पर ,निर्मला सिंह गौर की शहीदों को श्रद्धांजली gaurnirmalasingh.jagranjunction.com

OM DIKSHIT के द्वारा
January 26, 2014

‘छीछालेदर’ ! …..’अराजक’ या ‘अरविन्द’ ”राजनीतिक-आलोचना” (कांटेस्ट)

anilkumar के द्वारा
January 26, 2014

लघु कथा - प्रविष्टि ( वह आ रहे हैं ) http://anilkumar.jagranjunction.com/2014/01/26/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%86-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82/

jalaluddinkhan के द्वारा
January 26, 2014
Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 26, 2014

” जगत का प्रथम गणतंत्र ” कविता – ( कांटेस्ट )http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/26/जगत-का-प्रथम-गणतंत्र/

drshyamgupta के द्वारा
January 26, 2014

गज़ल …प्रविष्टि ( contest)..उन के अश्कों को……डा श्याम गुप्त…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 26, 2014

” बिम्ब टटके कई गीत में भर लिए ” कविता – ( कांटेस्ट ) http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/19/बिम्ब-टटके-कई-गीत-में-भर-लि/

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 26, 2014

कविता-गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर : प्रफुल्लित भारत जन-गण-मन ![कांटेस्ट] http://shikhakaushik.jagranjunction.com/2014/01/26/%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%AD-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%B0-%E0%A4%AA/

vaidya surenderpal के द्वारा
January 26, 2014
ikshit के द्वारा
January 26, 2014

आलोचना – (Critique)- {राजनीतिक , सामाजिक} – प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) !! Gantantra Diwas par : संविधानित-तलाश : Kya Behtar Desh Mil Sakta Hai?!! लिंक http://ikshit.jagranjunction.com/2014/01/26/gantantra-diwas-par-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-kya-behtar-desh-mil-sakta-hai/

ikshit के द्वारा
January 26, 2014

कविता – (Poems)– प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) !! देश-बचाओ-राजनीति-नहीं !! लिंक http://ikshit.jagranjunction.com/2013/11/11/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%93-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/

ikshit के द्वारा
January 26, 2014

कविता – (Poems)– प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) !! बस…-थोड़ी-सी-धूप-और !! लिंक http://ikshit.jagranjunction.com/2014/01/17/%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E2%80%A6-%E0%A4%A5%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%94%E0%A4%B0/

drshyamgupta के द्वारा
January 25, 2014

कविता …प्रविष्टि ( कांटेस्ट)..मम्मी इमोशनल होगई हैं… डा श्याम गुप्त

drshyamgupta के द्वारा
January 25, 2014

लघु कथा..प्रविष्टि( कांटेस्ट) ‘आठवीं रचना’…डा श्याम गुप्त….

ikshit के द्वारा
January 25, 2014

कविता – (Poems)– प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) !! मेरी-बहना !! लिंक http://ikshit.jagranjunction.com/2014/01/01/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A4%BE/

ikshit के द्वारा
January 25, 2014
ikshit के द्वारा
January 25, 2014
MRIDUL SAXENA के द्वारा
January 25, 2014

लघु कथा http://mridulsaxena.jagranjunction.com/2013/07/27/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/

pk92 के द्वारा
January 25, 2014

लघुकथा : जिम्मेदारी

Vinay के द्वारा
January 25, 2014

कैसे कहे की देश आज़ाद है? आज भी इस देश में हर जगह महंगाई का ही स्वाद है​​ इसपर किसी भी पार्टी की नज़र नहीं गयी अबतक इसका विरोध करने वाला सिर्फ ​समाजवाद है आज भी पूरा राष्ट्र ​​नेताओं के आधीन है सिर्फ समाजवाद के अनुयायी ही राष्ट्र में स्वाधीन है इतनी ज्वलंत मुद्दे का कोई विरोध नहीं करता नेताओ का अब यही काम है वो अपनी पेट या जेब है भरता ऐसी स्थिति कभी नहीं हुई जैसी आज है बासमती से भी महंगा बिकता आजकल प्याज है इनसे है क्या लेना देना इनकी कुर्सी है अनमोल रातो रात बढ़ गया दाम महँगी हुई अब पट्रोल!

ranjanagupta के द्वारा
January 25, 2014

बुद्ध का गृह त्याग !!! कविता !! http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2014/01/05/636645/

POEM- CONTEST के द्वारा
January 25, 2014

मकाम सफर में थे ह्म ठहरें हवाये थी उलट कर्कस घुमड़ कर थे जरा बादल क्षितिज पर आ गए बरबस तड़ित भी राह रोके थी खड़ी हम थे बड़े बेवस हवा आइ है पूरब से अंधेरा छट गया फिर से चलो एक बार फिर से हम प्रस्थान करते है नैया को हवाओं से फिर रफ्तार देते है सफर के इस मकाम को भी अब सलाम करते है (डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी) ” मेरा नया साल ” चलो नव बर्ष में कोई नई शुरुआत करते है, नई आशाओ को नैया की नई पतवार देते है, निकलकर आशियाने से हम नई राहे तलासेंगे, सफ़र में है , चलना काम , हम चलते ही जायेंगे। . तमन्ना थी मेरी एक दिन नई मंजिल को पाउँगा, सफलता पा के अपने पे, बहुत इतरा सा जाऊँगा, मगर अब हाल है दूजा, फिकर मंजिल नहीं मेरी, अब चलना चाहता हूँ रहना, जो फितरत सी है मेरी। राहों में मजा लेता हूँ , पड़े हो फूल या कांटे, शरद हो या बसंत, अब एक से लगती मुझे राते, तुम्हारी मंजिले तुमको मुबारक ओ मेरे साथी, सफ़र की लत लगी मुझको, मुझे चलना अभी बाकी। डॉ प्रमोद कुमार तिवारी “स्वार्थ ” क्यों चलाते हो नफरतो की हवा, आशियाने उड़ते है हमारे भी तुम्हारे भी, जिसको समझते हो जीत अपनी , हार बनती है हमारी भी तुम्हारे भी, काम जाहिलो से करते हो, खुद को वाइज कहलाने के लिए , क्यों फेकते हो चिंगारी हमपे , घर तो जलते है हमारे भी तुम्हारे भी, बेबक्त लाते हो आँख में आँसू , हमारे जख्मो को भूल जाते हो, गाते फिरते हो मर्सिया केवल , दिल जलता है हमारा भी तुम्हारा भी, आओ मिल जुल आगे बढ़ते है , बीती बातो को भुल जाते है , रस्ते के काटो को रास्ता दिखाते है, पाव लहूलुहान होते है हमारे भी तुम्हारे भी , डॉ प्रमोद कुमार तिवारी Prem उस पल जब हम तुम मिले, तो ना तू था ना मे, केवल हवा और उसकी खुशबू, सागर और सन्नाटा था, शायद था भी नही भी, जीवन तो था पर गतिहीन,ह्रिदयस्पन्दित था पर स्वर हीन, चेतना थी पर बुधिहीन, स्पर्श भी था पर वासना-हीन, मिल गये थे हम तुम शास्वत से शायद, पर जान नही पाया कब तक, क्योंकि समय तो था पर गतिहीन…………… प्रमोद कुमार तिवारी Mere bichar मॆरॆ बिचरॊ का अस्पस्ट सँसार कॊहरॆ कॆ पार का जैसा गुबार अशान्त जल मॆ मचलता प्रतिबिम्ब् अनदॆखॆ दॆश का जैसा बिम्ब धुन्ध कॆ पार नजर डालनॆ की कॊशिश जैसॆ चलती पवन कॊ पकडनॆ की चाह असफल हॊता मॆरा हर प्रयास नियति का मुझ पॆ बन उपहास चलता फिर भी इस आसय कॆ साथ निकलॆगा सूरज हॊगी रॊशनी ऎक बार छटॆगा धुन्ध स्थिर हॊगा प्रतिबिम्ब् मै बनुगा अखन्ड,स्थिर और निर्विचार प्रमॊद तिवारी मनुष्य हूँ जीना चाहता हूँ ” आशाओ के जमीन पर कल के सुनहरे सपने बोता हूँ पतंगों के माफिक रौशनी के पास में उड़ता हूँ मनुष्य हूँ जीना चाहता हूँ . बीते हुए कल का फूल जो श्यामल था और भयावह भी उसी के पंखुडियो पर कल के सुनहरे रेखाक्रम खीचता हूँ मनुष्य हूँ जीना चाहता हूँ . कहते थे लोग मुझे मन तेरा खंडित और बिद्रूप है मन की ही काली सयाही से कल का राजहंस उकेरता हूँ मनुष्य हूँ जीना चाहता हूँ . चेतना मेरी लघु अज्ञान असीम है अज्ञान के ही काले साये में संभावनाओ के बीज बोता हूँ मनुष्य हूँ जीना चाहता हूँ . “प्रमोद कुमार तिवारी” Tum लक्ष्य भ्रमित था, राह कठिन था, पावं थके थे चलते चलते, राहों में तुम आन मिले तो चला दूर तक चलते चलते. . मन खाली था ह्रदय शून्य था आँखे भी पथरायी सी तेरे आने से जीवन में बाज उठी शहनाई सी. दवंद था मन में सांसे कम्पित सीने में गुबार भरा हाथो से जब हाथ मिले तो जीवन में मधुमास भरा. मन है हर्षित आँखे अश्रुत अहो भाव सा जीवन में प्रेम पथिक का साथ साथ मिला तो रंग भरा रेखाक्रम में प्रमोद कुमार तिवारी (एम. टेक)

ranjanagupta के द्वारा
January 25, 2014

सुनो मै दीप हूँ !!! कविता !! http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/01/02/638556/

nishamittal के द्वारा
January 25, 2014

गिरगिटी नेताओं को आइना दिखाना होगा राजनैतिक आलोचना (कांटेस्ट ) http://nishamittal.jagranjunction.com/2014/01/24/%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%86%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF/

ranjanagupta के द्वारा
January 25, 2014
Charchit Chittransh के द्वारा
January 25, 2014

कविता-मेरी सुहागरात…काँटेस्ट http://swasasan.jagranjunction.com/?p=690250

Charchit Chittransh के द्वारा
January 25, 2014

कविता “मेरी सुहागरात….(काँटेस्ट)” http://swasasan.jagranjunction.com/http://www.swasasan.com आपकी आलोचना प्रशंसा से अधिक गुणकारी है….

sadguruji के द्वारा
January 24, 2014

लघु कहानी-http://sadguruji.jagranjunction.com/2014/01/24/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95/

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 24, 2014

“मेनका श्रृंगार फिर करने लगी है” ग़ज़ल – (कांटेस्ट) http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/19/मेनका-श्रृंगार-फिर-करने-ल/

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 24, 2014
Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 24, 2014

नूर में ज्यों नहाई हुई चांदनी , कविता-कांटेस्ट tp://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/23/नूर-में-ज्यों-नहाई-हुई-चां/

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 24, 2014

http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/15/अपने-मन-के-रिक्त-आँगन-में-क/ ” अपने मन के रिक्त आँगन में ” कविता – ( कांटेस्ट)

ajay kumar pandey के द्वारा
January 24, 2014

कविता राजनीती नटवरलाल केजरीवाल कांटेस्ट

Charchit Chittransh के द्वारा
January 24, 2014

दोस्तो; कुछेक डेढ़-दो बर्ष के बाद जा. ज. पर वापसी कर रहा हूँ… ॥हर प्रश्न पर क्यों प्रश्नचिन्ह???॥ कविता कान्टेस्ट – लिन्क- http://swasasan.jagranjunction.com/?p=691611 के साथ … कृपया आँकलन करें … आलोचना॥ समालोचना का स्वागत् है…….

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 23, 2014

    कविता (नूर में ज्यों नहाई हुई चांदनी)– ( कांटेस्ट )

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
January 23, 2014

पुरुषों के बराबरी के चक्कर में महिलाओं ने अपना कद छोटा किया है / ( सामाजिक आलोचना) कांटेस्ट http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2014/01/23/%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95/

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 23, 2014

गज़ल -तुम यह न समझना की ,(कांटेस्ट ) द्वारा निर्मला सिंह गौर gaurnirmalasingh.jagranjuction.com

yamunapathak के द्वारा
January 23, 2014
jalaluddinkhan के द्वारा
January 22, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal) प्रविष्टि लिंक – http://jalaluddinkhan.jagranjunction.com/2014/01/22/%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%8B/

Ritu Gupta के द्वारा
January 22, 2014
January 22, 2014

kavita http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/22/हमारे-स्वाभिमान-के-प्रती/

vaidya surenderpal के द्वारा
January 22, 2014
jalaluddinkhan के द्वारा
January 22, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal) प्रविष्टि लिंक – http://jalaluddinkhan.jagranjunction.com/2014/01/22/तुम्हें-भूले-तो

neena के द्वारा
January 22, 2014

http://neena.jagranjunction.com contest(kvita) mayajal hai dukh

aman kumar के द्वारा
January 22, 2014
nishamittal के द्वारा
January 22, 2014

गुनाह -भुखमरी और अन्न की बर्बादी (पूर्व प्रकाशित )राजनैतिक आलोचना कांटेस्ट http://nishamittal.jagranjunction.com/2014/01/21/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B0-2/

neena के द्वारा
January 22, 2014

neena.jagranjunction.com (kvita) contest

neena के द्वारा
January 22, 2014

साहित्य सरताज कांटेस्ट (कविता) मायाजाल है दुःख

sadguruji के द्वारा
January 22, 2014

कविता-http://sadguruji.jagranjunction.com/2014/01/22/%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80/

jalaluddinkhan के द्वारा
January 21, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal) प्रविष्टि लिंक – http://jalaluddinkhan.jagranjunction.com/2014/01/21/मौसम-कोई-हो/

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 21, 2014
vivanrana के द्वारा
January 21, 2014

  कविता- हमको मोहब्बत है ज़िंदगी  से|  http://vivanrana.jagranjunction.com 

alkargupta1 के द्वारा
January 21, 2014

माननीय संपादक मंडल \ मान्यवर महोदय , साहित्य सरताज प्रतियोगिता हेतु निशाजी के दो ब्लॉग १ लघुकथा ..”श्राद्ध” २- सामाजिक आलोचना -फैशन बनता बलात्कार (सो गयी है आत्मा )यहाँ नहीं खुल पा रहे थे अतः मैंने उनसे अनुमति लेकर इन दोनों ब्लॉग्स के लिंक को कॉपी करके पुनः यहाँ पेस्ट कर दिए है उन्हें यहाँ लिंक पेस्ट करने में कुछ कठिनाई आ रही थी यह बात आपके संज्ञान में लाने के लिए ही यह कमेंट मैं पोस्ट कर रही हूँ सधन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
January 21, 2014

सामजिक आलोचना …” फैशन बनता बलात्कार ……सो गयी है आत्मा ” कांटेस्ट http://nishamittal.jagranjunction.com/2014/01/17/%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%88-%E0%A4%B9/

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 21, 2014

कविता – क्यों कहे हैं आपने ..(..कांटेस्ट ) gaurnirmalasingh.jagranjuction.com

January 21, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)ग़ज़ल-बहाने बेटे की सुध ले हिन्द की माना अब डर के .[contest ] http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/20/%E0%A4%97%E0%A4%BC%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7-%E0%A4%B2%E0%A5%87/

January 20, 2014

कविता http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/20/लङकी-का-भाग्य-contest/कविता 

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 20, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)ऐसे नहीं चल पायेगी दुकान-ए-सियासत ![CONTEST ] http://shikhakaushik.jagranjunction.com/2014/01/20/%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%8F/

anilkumar के द्वारा
January 20, 2014

संस्मरण - प्रविष्टि ( वह कुछ पल )    http://anilkumar.jagranjunction.com/2014/01/20/%e0%a4%b5%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%aa%e0%a4%b2-contest/

abhishek shukla के द्वारा
January 20, 2014

अज्ञात (कांटेस्ट) http://flowerfantasy.jagranjunction.com/2013/12/03/अज्ञात/

jlsingh के द्वारा
January 20, 2014

किरण जी, आपने देर कर दी या सही अवसर चुना!राजनीतिक समालोचना (कांटेस्ट) http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/15/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B9/

jlsingh के द्वारा
January 20, 2014
jlsingh के द्वारा
January 20, 2014
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
January 20, 2014

लघुकथा – असंवेदनशीलता – http://spandan.jagranjunction.com/?p=690834

sadguruji के द्वारा
January 20, 2014

संस्मरण-http://sadguruji.jagranjunction.com/2014/01/20/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%B6%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%8F%E0%A4%95/

yamunapathak के द्वारा
January 20, 2014
neena के द्वारा
January 20, 2014

कविता _मायाजाल है दुःख (कांटेस्ट)

nishamittal के द्वारा
January 20, 2014

   गुनाह -भुखमरी और अन्न की बर्बादी (पूर्व प्रकाशित )राजनैतिक आलोचना   http://nishamittal.jagranjunction.com/2014/01/20/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B0-2/

कविता – उस प्यारे से बचपन में – http://spandan.jagranjunction.com/?p=690135

vaidya surenderpal के द्वारा
January 20, 2014
vivanrana के द्वारा
January 19, 2014

कविता- हमको मोहब्बत है ज़िंदगी से|http://vivanrana.jagranjunction.com/

OM DIKSHIT के द्वारा
January 19, 2014

बड़का चाचा …संस्मरण…कांhttp://omdikshit.jagranjunction.com/2014/01/19/%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-i-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A3-i-ii-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87/टेस्ट

OM DIKSHIT के द्वारा
January 19, 2014

संस्मरण …..कांटेस्ट…….बड़का चाचा ….

    OM DIKSHIT के द्वारा
    January 19, 2014

    http:omdikshit.jagranjunction.com/2014/01/19/संस्मरण…कांटेस्ट…बड़का चाचा

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 23, 2014

    मेनका श्रृंगार फिर करने लगी है ( ग़ज़ल – कांटेस्ट )

nishamittal के द्वारा
January 19, 2014

लघु कथा कांटेस्ट श्राद्ध                    http://nishamittal.jagranjunction.com/2014/01/14/%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%83-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D/#comments

    alkargupta1 के द्वारा
    January 21, 2014

    माननीय संपादक मंडल \ मान्यवर महोदय , निशाजी के यह कांटेस्ट ब्लॉग उनके अपने अकाउंट से पोस्ट नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उनसे अनुमति लेकर अपने अकाउंट से यहाँ पोस्ट कर दिए हैं मैं अनुरोध करती हूँ , इस ब्लॉग को उन्हीं के नाम से प्रतियोगिता मैं सम्मिलित करने की कृपा करें सधन्यवाद

    alkargupta1 के द्वारा
    January 21, 2014

    माननीय संपादक मंडल \ मान्यवर महोदय ., निशाजी द्वारा साहित्य सरताज कांटेस्ट के लिए पब्लिश किये गए उनके ब्लॉग नहीं खुल पा रहे थे अतः मैंने उनसे अनुमति लेकर उनके दो ब्लॉग १-लघु कथा ..”श्राद्ध ” २- सामाजिक आलोचना “फैशन बनता बलात्कार (सो गयी है आत्मा ” यहाँ टिप्पणी में पोस्ट कर दिए है अतः मैं आपको यह अवगत करा रही हूँ कि ये ब्लॉग मेरे नहीं हैं निशाजी के ही हैं इन ब्लॉग्स को पोस्ट करने में उन्हें कुछ समस्या आ रही थी अतः मैंने पोस्ट किये ….. सधन्यवाद

vaidya surenderpal के द्वारा
January 18, 2014
alkargupta1 के द्वारा
January 18, 2014

आलेख .. सामाजिक आलोचना ‘ मानव प्रकृति और फाल्स सीलिंग ‘ (कांटेस्ट) http://alkargupta1.jagranjunction.com/2014/01/18/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%B2-2/

nirmalasinghgaur के द्वारा
January 18, 2014

आपके कांटेस्ट ने लेखकों की कलम को गतिशीलता दे दी है ,साहित्य सेवा की इस भागीरथ योजना के लिए जागरण जंक्शन को अनेक शुभ कामनाएं . सादर , निर्मला सिंह गौर

yamunapathak के द्वारा
January 18, 2014
aman kumar के द्वारा
January 17, 2014

(iv) संस्मरण – (Reminiscence) http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=688821

    nirmalasinghgaur के द्वारा
    January 18, 2014

    कविता –ओ  पतझड़ के अंतिम त्रण (कांटेस्ट)   http:// gaurnirmalasingh.jagranjunction.com

alkargupta1 के द्वारा
January 17, 2014
जागरण Contest के द्वारा
January 17, 2014

सभी पाठकों से अनुरोध है कि कॉंटेस्ट के लिए लिंक पेस्ट करने से पहले आप अपने ‘अकाउंट’ से ‘लॉग आउट’ हो जाया करें। कई यूजर आलेख के प्रिव्यू के लिंक यहां पेस्ट करते हैं। ‘Log In’ रहते हुए प्रिव्यू के लिंक आपके आलेख के वास्तविक लिंक पर नहीं खुलेंगे| कृपया लिंक पेस्ट कर उसे स्वयं खोलकर देख भी लें कि वह खुल रहा है अथवा नहीं। अगर नहीं खुल रहा तो लिंक पेस्ट करने में कोई गलती होगी। इसलिए दुबारा यह निश्चित करते हुए कि आप अपने जंक्शन अकाउंट से लॉग आउट हैं आलेख का लिंक पेस्ट करें। आपके आलेख के ऊपर ब्राउजर में जो लिंक होते हैं केवल उसे ही कॉपी कर आपको यहां पेस्ट करना है।

    nirmalasinghgaur के द्वारा
    January 18, 2014

    कविता –मोह  (कांटेस्ट ) hhp:// gaurnirmalasingh.jagranjuction.com

    nirmalasinghgaur के द्वारा
    January 18, 2014

    कविता –मोह  (कांटेस्ट ) gaurnirmalasingh.jagranjuction.com

    nirmalasinghgaur के द्वारा
    January 18, 2014

    कविता -संतुलन  (कांटेस्ट ) निर्मला सिंह गौर  जब हवा कुछ सर चढ़ी होने लगी ,तो धरा की बेहतरी होने लगी उड़ चले बादल मरुस्थल की तरफ़ ,रेत भी थोड़ी हरी होने लगी .  कैद जब से हो गया नदिया का जल ,तो धरा पर रात में दिन हो गया बस गईं लघु सूरजों की बस्तियां ,चाँद का तेजस्व भी कम हो गया . पर्बतों की शल्य जब से हो गयी, लौह ताम्बे की खदाने खुद गयीं कारखाने खा गए खलिहान को ,रेल ,सड़कें खेत को निगल गयीं . आम के बागान जब से कट गए ,कोयलें भी बेसुरी होने लगीं तितलियों के पंख धुंदले पड़ गए ,जब गुलों की तस्करी होने लगी . दौड़ में सब लोग शामिल हो गए ,रिश्ते नाते भीड़ में सब खो गए सोते बच्चे छोड़ निकला था सुबह ,रात जब लौटा तो बच्चे सो गए . क्या तरक्की का यही अवतार है ,अविष्कारों का बड़ा आभार है प्यार कम और शौक सुबिधायें अधिक ,संतुलन भी तो यहाँ दरकार है                                                   संतुलन भी तो यहाँ दरकार है .gaurnirmalasingh.jagranjuction.com

aman kumar के द्वारा
January 16, 2014

v) आलोचना – (Critique) – निम्न तीन आलोचना वर्ग के अंतर्गत यूजर अपनी रचनाएं शामिल कर सकते हैं: – -राजनीतिक अब तो तोल – मोल कर बोलो आप “- कांटेस्ट http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=687339 

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 15, 2014
sadguruji के द्वारा
January 15, 2014

संस्मरण-सत्यकथा-http://sadguruji.jagranjunction.com/2014/01/15/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%98-%E0%A4%B2%E0%A5%9C%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B/

    neena के द्वारा
    January 15, 2014

    कविता _ प्रकृति का दर्द

Sonam Saini के द्वारा
January 15, 2014

ग़ज़ल —http://sainisoni.jagranjunction.com/2014/01/15/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A5%9A%E0%A5%9B%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F/

shashankchandra के द्वारा
January 15, 2014
upasna siag के द्वारा
January 14, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’(संस्मरण)मेरे वेलन्टाइन मेरी गुरु महाराज मथुरा बाई…http://upasnasiag.jagranjunction.com/2014/01/14/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%AE/

upasna siag के द्वारा
January 14, 2014
alkargupta1 के द्वारा
January 14, 2014
anilkumar के द्वारा
January 14, 2014

आलोचना - प्रविष्टि ( अभी तो लट्टू घूम रहा है ) http://anilkumar.jagranjunction.com/2014/01/14/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%82-%e0%a4%98%e0%a5%82%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-contest/

nishamittal के द्वारा
January 14, 2014

फैशन बनता बलात्कार ,(सो गई है आत्मा ) आलोचना …………..सामजिक http://nishamittal.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=2381

nishamittal के द्वारा
January 14, 2014

अपने जीवन से सौतेला व्यवहार क्यों? आलोचना सामाजिक http://nishamittal.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=2213

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 14, 2014

acharyagunjan.jagranjunction.com/2013/11/23/मन-में-अनगिन-कोमल-भाव-सँवर/

shashankchandra के द्वारा
January 14, 2014

भाई की शुभकामनाऐँ CONTEST http://shashankchandrasak.jagranjunction.com/2014/01/14/भाई-की-शुभकामनाऐँ-contest/

shashankchandra के द्वारा
January 14, 2014

भाई की शुभकामनाऐँ CONTEST http://shashankchandrasak.jagranjunction.com/2014/01/14/भाई-की-शुभकामनाऐँ-contest/

shashankchandra के द्वारा
January 13, 2014
vivanrana के द्वारा
January 13, 2014

 आलोचना-**** समाज कहें या दरिंदगी****  http://vivanrana.jagranjunction.com/

January 12, 2014

आलोचना [सामाजिक]-धारा ३७५ -भारतीय दंड संहिता :एक आलोचनात्मक विश्लेषण -contest http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/12/%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A5%A9%E0%A5%AD%E0%A5%AB-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%A6%E0%A4%82/

Dr. Ranjana Gupta के द्वारा
January 12, 2014
Dr. Ranjana Gupta के द्वारा
January 12, 2014
vivanrana के द्वारा
January 12, 2014

  कविता- शायद लोग बदलते जा रहे हैं/ http://vivanrana.jagranjunction.com/

ranjanagupta के द्वारा
January 11, 2014

प्यास का जंगल !!!,contest !!! कविता !!!http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2014/01/06/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2/

January 11, 2014

कविता http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/11/जेहाद-नहीं-पाप-है-contest/कविता 

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 11, 2014
January 10, 2014
January 10, 2014

कविता – (Poems)-विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी [contest ] http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/10/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%89%E0%A4%B2/

opkanaujia के द्वारा
January 10, 2014

कांटेस्ट-ग़ज़ल जादू सा कर गया है दिल में उतर गया है हमराह बनके चलना कहके मुकर गया है यादों में उसके अब तक शाम-ओ-सहर गया है गतिमान विश्व में वह ध्रुव सा ठहर गया है टूटे ह्रदय में बनके पैबंद जुड़ गया है छोटा सा ये फ़साना जीवन सा बन गया है

    Nirmala Singh Gaur के द्वारा
    January 20, 2014

    लघुकथा ,गंगा राम की समस्या,कोंटेस्ट ( ब्लॉग का नाम इन्द्रधनुष )nirmalasinghgaur.blogspot.in

yogi sarswat के द्वारा
January 10, 2014

” वहाँ ” जिंदगी कदम कदम रोती होगी ( सामाजिक ) http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2013/04/15

pankajpriyam के द्वारा
January 10, 2014

कांटेस्ट -कविता -ग़ज़ल जिंदगी कुछ धुंधली शाम सी लगती है भीड़ में भी दुनिया गुमनाम सी लगती है । यूँ तो कभी पीता नही ,पर लडखडाता हु जब गम -ऐ -इश्क भी जामसी लगती है । भीड़ में भी तनहा रहने की कसम खा ली है ये दुनिया भी कुछ अनजान सी लगती है । सपने आते हैं अक्सर टूट जाते हैं फुल खिलते है और बिखर जाते हैं । फैसले कर सजा भी खुद दे लेते हैं नाम की ये जहाँ भी बदनाम सी लगती है । जिंदगी भी रुसवा होके कभी शाम सी लगती है तन्हाई में भी कभी -कभी रुसवाई की निदान सी लगती है । – पंकज भूषण पाठक “प्रियम”

pankajpriyam के द्वारा
January 10, 2014

कविता -प्रविष्टि(ब्लॉग पोस्ट) लिंक contest-kavita-मै बदन बेचती हूँ उस औरत के तन का कतरा-कतरा फुट बहा है तभी तो चीख-चीख कहती हाँ मै बदन बेचती हूँ अपनी तपिश बुझाने को नही पेट की भूख मिटाने को नही मै बेचती हूँ बदन ,हां बेचती हूँ मै भूख से बिलखते रोते -कलपते दो नन्हे बच्चो के लिए मैं अपनी लज्जा अपनी अस्मत बेचती हूँ छाती से दूध क्या लहू का एक कतरा तक न निकला सूखे होठो के लिए आँख के आंसू भी कम पड़े तो इन अबोध बच्चो की खातिर आपने सिने को गर्म सलाखों से भेदती हूँ हाँ मै बदन बेचती हूँ ठण्ड से ठिठुरते बदन पर धोती का इक टुकड़ा भर कैसे इन बच्चो को तन से चिपका रखा देखि नही किसी ने मेरी ममता नजर पड़ी तो बस फटे कपड़ो से झांकते मेरे जिस्मो बदन पर दौड़ पड़े सब पागल कुत्तो की तरह इनके पंजो से बचने की खातिर हवसी नजरो से बदन ढंकने की खातिर मै आँखों की पानी बेचती हूँ दर्द से कराहते बच्चो की खातिर हाँ मैं बदन बेचती हूँ पर इन सफ़ेदपोशो के जैसे अपने ज़मीर नही बेचती हूँ चाँद सिक्को की खातिर अपना ईमान नही तौलती हूँ कोई चोरी पाप नही कोई जहां के भूखे भेड़ों से बचने की खातिर अपनी दौलत नीलाम करती हूँ इन मासूम बच्चो की दो रोटी की खातिर हाँ मै बदन बेचती हूँ आखिर हूँ तो एक माँ नही देख सकती बच्चो का दर्द नही सुन सकती उनकी चीत्कार उन्हें जीवन देने की खातिर खुद विषपान करती हूँ हाँ मैं बदन बेचती हूँ— —पंकज भूषण पाठक “प्रिय

seema के द्वारा
January 10, 2014

खट्टी – मीठी यादें -२ अम्मा सब्बा ( कांटेस्ट ) http://seema.jagranjunction.com

aman kumar के द्वारा
January 10, 2014

    आलोचना – (Critique) –  -राजनीतिक                           http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=684065#comment-191316

Neelima Sharma के द्वारा
January 9, 2014

कविता —२५ साल पुराने ख़त http://www.jagranjunction.com/tag/%E0%A5%A8%E0%A5%AB-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A5%99%E0%A4%A4/ आज सुबह से व्यस्त हूँ पुरानी अलमारी में रखे खतो को संजोने में कितनी खुशबुए मेरे इर्द गिर्द सम्मोहित कर रही हैं मुझे वोह प्यार का पहला ख़त मुझे मिलने के बाद पहली ही रात को लिखा और उस दिन बजता आल इंडिया रेडियो पर गाना ” कभी आर कभी पार लगा तीरे नजर” मेरे जन्मदिन पर लिखे अनेको ख़त जिसमे से सिर्फ एक पोस्ट किया था मुझे और अंत में फिर से आल इंडिया रेडियो फिर से साथ था तुम्हारे लफ्जों में “तुम जो मिल गये हो तो यह लगता हैं ” वोह विवाह पूर्व का करवाचौथ और तुम्हारा ख़त अगले साल हम दोनों साथ होंगे इस दिन और तुम मेरे लिय सजोगी उस दिन और इस बार भी अंतिम लाइन आल इंडिया रेडियो के सौजन्य से ” मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार ” ख़त दर ख़त मैं सुनती थी गाने तुम्हारे साथ ख़त चाहे ४ दिन बाद मिलता लेकिन गाना उस वक़्त बजता मेरे जहन में आखिरी ख़त जो मुझे मिला था विवाह से ३ दिन पहले लबरेज़ था तुम्हारे प्यार से अंतहीन प्रतीक्षा से गुजरे विरह को बतलाता हुआ और तब आप का आल इंडिया रेडियो गा रहा था ‘ वादा करले साजना , तेरे बिना मैं न रहू मेरे बिना तू न रहे ” आज भी खतो को पढ़ते हुए वही स्वर सुन रही हूँ वही धुन बज रही हैं वैसे ही थिरक रही हैं मेरी धड़कन सुनो ना २५ साल पुराने ख़त आज भी इतने ताजा से क्यों हैं —

vaidya surenderpal के द्वारा
January 9, 2014
    Nirmala Singh Gaur के द्वारा
    January 20, 2014

    ग़ज़ल ,दर्द का तनहा सफ़र है , कांटेस्ट gaurnirmalasingh.jagranjunction.com

upasna siag के द्वारा
January 9, 2014

Contest – साहित्य सरताज (लघु कथा )एक पल.. सुधा जब से किट्टी पार्टी से लौटी है तभी से चुप है। जैसे कुछ सोच रही है। हाँ , सोच तो रही है वह। आज जो बातें किट्टी में हुई। वे बातें उसे थोडा आंदोलित कर रही है। कभी -कभी वह खुद अपने आप पर ही झुंझला जाती है कि वह दूसरी औरतों की तरह बेबाक क्यूँ नहीं है। क्यूँ नहीं वह उनकी बचकानी बातों का समर्थन कर खिलखिला कर हंसती। आज तो बहुत गम्भीर विषय था तो भी बातों का स्तर कितना हल्का था। बात दामिनी को ले कर चली थी। एक वर्ष पहले जो दामिनी के साथ हादसा हुआ और किस तरह सभी के मनों को झिंझोड़ गया था। लेकिन जितना शोर मचा था वह सिर्फ मिडिया में ही था। बहुत कम लोग थे जिन्होंने दामिनी से सहानुभूति दिखाई हो। क्या उसके बाद ऐसे हादसे नहीं हुए ! सारिका के यह कहने पर कि बॉय फ्रेंड के साथ कु -समय जायेगी तो यही होगा ! सुधा से रहा नहीं गया और बोल पड़ी कि यह भी क्या बात हुई अगर वह उस समय अपनेकिसी परिजन के साथ होती तो या अगर घर में कोई बीमार हो जाता और उसे अचानक अकेली ही घर से निकलना पड़ता तो ! क्या जो कुछ उसके साथ हुआ वह जायज था। हम सभ्य समाज में रहते हैं। किसी जंगल में तो नहीं कि भेड़िया आएगा और खा जायेगा। क्या उन लोगों के अपने परिवार की कोई लड़की होती तो क्या वे सब यह करते। इस पर भी कई मतभेद उभरे। लेकिन सभी का एक मत कि देर रात ऐसे घर से निकलना नासमझी ही है। जब तक हालत सुधरते नहीं। खुद की सावधानी भी जरुरी होती है। खुद सावधान रहना चाहिए। इस बात को तो सुधा भी मानती है। वह बचपन में ही माँ से सुनती हुई आयी थी कि अपनी सावधानी से हमेशा बचाव रहता है। माँ रात को सोने से पहले घर के सारे कुंडे -चिटकनिया और परदे के पीछे हमेशा झाँक कर देखती और सावधानी का वाक्य दोहरा देती थी। जब वह होस्टल गयी तो भी माँ ने यही वाक्य दोहराया और यह भी सलाह दे डाली कि किसी से भी ज्यादा दोस्ती ना करो ना ही बैर रखो। माँ की यह सलाह उसके गाँठ बांध ली और अभी तक अमल करती है इस बात पर। तभी तो वह सभी से एक सामान व्यवहार कर पाती है। सुधा सोच रही थी कि हादसे तो कभी भी हो सकते हैं। रात का होना कोई जरुरी तो नहीं। यह तो बुरा वक्त होता है जो किसी का आना नहीं चाहिए। वक्त अगर दामिनी का खराब था तो वक्त उन दरिंदो का भी अच्छा नहीं था। तभी तो उनसे यह वारदात हुई। बुरे वक्त और अच्छे वक्त के बीच एक पल ही होता है जो इंसान पर हावी हो जाता है। ऐसा ही एक पल सुधा की जिंदगी में आया भी था। अगर वह स्वविवेक से काम न लेती तो…!इससे आगे वह सोच नहीं पाती और सिहर जाती है। हालंकि इस घटना को 26 वर्ष से भी अधिक हो चूका था लेकिन ! जब वह होस्टल में थी तब उसके ताऊ जी भी वहीँ शहर में ही रहते थे। वह अक्सर छुट्टी के दिन उनके घर चली जाया करती थी। एक बार तीन छुट्टियाँ एक साथ पड़ रही थी तो उसने ताउजी के घर जाने की सोची। वार्डन से छुट्टी की आज्ञा ले कर हॉस्टल से बाहर आ गई। रिक्शा की तलाश करने लगी। उसको भीड़ से परेशानी और घुटन होती है तो वह सिटी बस से परहेज़ ही करती थी। एक रिक्शा मिला और 7 रुपयों में तय करके बैठ गई। लेकिन उसे लगा कि रिक्शा वाला गलत रास्ते पर जा रहा है । उसे रास्ता मालूम था। उसने रिक्शे वाले को टोका भी कि वह गलत जा रहा है। वह बोला कि ये शॉर्ट -कट है। सुधा ने सोचा हो सकता है कि इसे ज्यादा मालूम है। लेकिन उसे फिर भी शक हुआ जा रहा था कि वह गलत जा रहा है। कई देर चलने के बाद वह एक पैट्रोल -पम्प के पास जा कर रुका और बोला कि शायद वह रास्ता भूल गया और पूछ कर आ रहा है। सुधा चुप कर बैठी रही। तभी कुछ आवाज़ें सुनायी दी तो उसने गरदन घुमाई। सामने यानि पैट्रोल -पम्प के पीछे की तरफ एक कमरे के आगे से दो आदमी उसको अपनी तरफ बुला रहे है। वह रिक्शे से उतरने को हुई। अचानक फिर दिमाग में एक विचार कोंध गया कि वह क्यूँ उतर रही है !कलेजा उछल कर गले में आ गया। लेकिन कस कर रिक्शा पकड़ लिया और गरदन घुमा कर बैठ गई। थोड़ी ही देर में रिक्शा वाला आकर बोला कि वह खुद जा कर रास्ता पूछ ले। सुधा का हालाँकि कलेज़ा कांप रहा था फिर भी जबड़े भींच कर लगभग डांटते हुए बोली कि रास्ता उसे पता है। वह उसे ले जायेगी। रिक्शे वाला उसके तेवर देख कर सहम गया और रिक्शे पर बैठ कर बोला तो बताओ किधर ले चलूँ। सुधा के ताऊजी पुलिस के बड़े अधिकारी थे। उसने उनका नाम लेते हुए कहाँ कि उसे पुलिस स्टेशन ले चले। वही से वह उनके घर जायेगी। जहाँ उसने जाना था वहाँ के थाने का नाम लिया। थोड़ी देर में ही वह पुलिस स्टेशन के सामने था। उसके ताऊजी पुलिस अधिकारी तो थे लेकिन वे वहाँ कार्यरत नहीं थे। अब सुधा ने कहा कि रिक्शा आगे बढ़ाये और वह घर ही जायेगी। ऊपर से मज़बूत दिखने का ढोंग करती सुधा मन ही मन बहुत डर गयी थी। घर का रास्ता ही भूल गयी। सुबह 10 बजे की हॉस्टल से निकली सुधा को डर के साथ भूख भी सताने लगी थी। दोपहर के दो बजने को आये थे। अब तो रिक्शे वाला भी चिढ़ गया था। बोला कि जब उसे घर का पता नहीं था तो वह आयी ही क्यूँ ? तभी उसे थोड़ी दूर पर ताऊजी के घर के आगे गार्ड्स दिखाई दिए। राहत की साँस सी आई और रिक्शा वही ले जाने को कह दिया। घर के आगे पहुँच कर उसने रिक्शा वाले को 7 रूपये देने चाहे तो वह रुहाँसा हो कर बोला मालूम भी है कितने घंटे हो गए हैं। सुधा बोली ,”तेरी गलती ! मैं क्या करूँ तू गलत ले कर ही क्यूँ गया ! सामने गार्ड्स दिख रहे हैं क्या ? उनको बताऊँ तेरी हरकत , मैं तो ये सात रूपये भी नहीं देने वाली थी। चल जा यहाँ से। ” वह चुप करके रूपये ले कर चलता बना। सुधा का मन था कि काश आज माँ सामने होती और गले लग कर सारा डर दूर कर लेती। बाद में ताईजी को बताया तो उन्होंने कहा भी कि उसे जाने क्यूँ दिया।उसकी शिकायत करनी थी। लेकिन उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था और वह यह सोच ही नहीं पाई। तब ताईजी ने कहा कि जो बात हुई नहीं उस पर विचार मत करो और सोचो कि तुमने आज सात रुपयों में आधा शहर घूम लिया। दोनों हंस पड़ी इस बात पर। सोचते -सोचते वह मुस्कुरा पड़ी। यह एक पल ही होता है जो इंसान को अच्छे या बुरे वक्त में धकेल देता है। फिर भी खुद कि सावधानी जरुरी तो है ही।

upasna siag के द्वारा
January 9, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’(संस्मरण)मेरे वेलन्टाइन मेरी गुरु महाराज मथुरा बाई… मेरे वेलन्टाइन मेरी गुरु महाराज मथुरा बाई है। मैंने जब उनको पहली बार देखा तो उनसे मुहब्बत हो गयी। .एक सीधा सादा सा चेहरा मोहरा पर असाधारण व्यक्तित्व …! मैंने उनको पहली बार मेरी शादी के बाद देखा था जब माँ उनका आशीर्वाद दिलवाने पास के घर ले कर गयी थी। उनका प्यार से मेरे सर पर हाथ रखना मुझे अंतर्मन तक महसूस हुआ और मुझे लगा जैसे मेरे मन के तार उनसे जुड़ गए हो हालांकि मैंने उनको १० साल बाद गुरु धारण किया था पर उनसे प्यार उसी दिन हो गया था. महाराज जी का जीवन भी मुझे बहुत कारुणिक और मार्मिक लगता है। एक संपन्न परिवार में जन्मी और विवाहित मथुरा ,एक हादसे का शिकार हो कर एक टांग गवां बैठी तो पति ने त्याग दिया और मायके में रहने लगी। जहाँ उनके पति ने दूसरा विवाह कर के नई दुनिया बसा ली वहीँ मथुरा ने भी अपने ही गाँव में अपनी गुरु के माध्यम से ईश्वर से प्रीत जोड़ कर एक नई दुनिया में खो गयी। कुछ साल बाद उनके पति को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ तो किसी ने उसको याद करवाया कि हो सकता है ये मथुरा का श्राप हो और मैं भी मानती हूँ कि होता भी क्यूँ नहीं जिस के साथ सुख -दुःख निभाने का वादा किया था। उसको मुश्किल में अकेला छोड़ दिया। तब उनके पति को भी लगा और सपत्नीक माफ़ी मांगने आया। तब तक मथुरा हर मोह माया से मुक्त थी और उनको ना केवल माफ़ी दी और आशीर्वाद भी दिया। बाद में जब बेटा हुआ तो वह ,बेटे को भी आशीर्वाद दिलवाने लाया और कहा कि वह उनके गाँव में आ कर रहे और वह उनके लिए एक आश्रम का निर्माण भी करवा देगा पर उन्होंने मन कर दिया के जो गलियां छोड़ दी वहां पर अब बसेरा नहीं होगा। लेकिन उनके पति एक पत्नी के तो गुनहगार तो थे ही। उन्होंने एक मासूम ह्रदय को तो दुखाया ही था। अपने अंतिम समय में बहुत ही नारकीय यातना झेल कर गए है वे …! जब मैं उसने पहली बार मिली तो उन्होंने मुझे औरतो की तीन श्रेणी समझाई कि “औरते तीन तरह की होती है ” शंखिनी , हंसिनी और डंकिनी ” ‘हंसिनी ‘.. वह होती है जो कि हंसमुख तो होती ही है और हंस की तरह होती है जो मोती चुनती ही है। ‘शंखिनी’… वह जो दिखावे में कुछ और होती है अंदर से कुछ और होती है और ‘डंकिनी ‘…..वह जो हर बात में डंक सा मारती रहती है सामने वाले के गले पड़ कर बोलती है। वो बोली कि ये तुम्हें देखना है कि कैसे औरत बनना है ,तो मैंने तो हमेशा हंसिनी बनने का प्रयास ही किया है अब मुझे नहीं पता कि मैं इसमें कामयाब हुई या नहीं ………….:) एक और बात जो मुझे उनकी पसंद आयी, वो कहते है नारी को अपने शरीर की सुरक्षा करनी ही चाहिए हमेशा सावधान रहना चाहिए। मैं एक बार उनके आश्रम गयी तो उन्होंने स्वयं चाय बना कर पिलाई और साथ में बिस्किट्स भी खिलाये ,अपना काम वे खुद ही करती थी। एक पैर होने के बावजूद किसी की भी सहायता नहीं लेती थी। दिन में आश्रम में रहती थी पर शाम होते ही अपने मायके के परिवार में चली जाती है। उनका मानना था कि आखिर उनका शरीर नारी का ही है तो उसकी रक्षा करनी ही होगी तभी वह घर चली जाती थी। आत्मा शुद्ध होती है उसे कोई रोग नहीं छू सकता लेकिन यह जो हमारा शरीर है इसे कर्मो के अनुसार व्याधियां झेलनी ही होती है। महाराज जी भी मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रसित थे। यही बीमारियां उनके शरीर के अंत का कारण बनी। शरीर का अंत ही होता है आत्मा का नहीं। वो आज भी हमारे आस -पास ही मौजूद है। आज-कल जहाँ ढोंगी साधू वेशधारी चहुँ ओर मिल जायेंगे वहीँ मेरी गुरु महाराज मथुरा बाई जैसे पवित्र आत्माएं भी मिलेगी जिनको अपने प्रचार कि कोई जरूरत ही नहीं हुई। ईश्वर करे हमें उनका आशीर्वाद सदैव मिलता रहे।

Firdaus Khan के द्वारा
January 9, 2014
Firdaus Khan के द्वारा
January 9, 2014
aartisharma के द्वारा
January 9, 2014

कविता- आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी……. contest http://aartisharma.jagranjunction.com/2014/01/09/%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-contest/

aartisharma के द्वारा
January 9, 2014

कविता “ज़िन्दगी”contest http://aartisharma.jagranjunction.com/2014/01/09/%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80contest/

aartisharma के द्वारा
January 9, 2014

“ज़िन्दगी”contest http://aartisharma.jagranjunction.com/2014/01/09/%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80contest/

khusbu के द्वारा
January 9, 2014

गम (कविता) contest http: / /khushbu.jagranjuction.com

khusbu के द्वारा
January 9, 2014

शेरो  शायरी  contest http://khushbu.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
January 9, 2014

साहित्य सरताज प्रतियोगिता के लिए एक संस्मरण के साथ बाल श्रम निषेध दिवस पर लिखा गया आलेख “बचपन के दिन हैं उम्र खेलने की” http://nishamittal.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=2236

January 9, 2014

आलोचना – (Critique)-राजनीतिक -मीडिया भैंस [contest ] http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/09/%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%B8-contest/

jlsingh के द्वारा
January 8, 2014

“मन मयूर नाच उठे” यह कविता पूर्व प्रकाशित है इसका लिंक कांटेस्ट के लिए दे रहा हूँ – सादर = जवाहर लाल सिंह http://jlsingh.jagranjunction.com/2013/07/28/%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9A-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%87/

jlsingh के द्वारा
January 8, 2014

लहरें …सागर की …पूर्व प्रकाशित कविता है इसे कविता विधा में कांटेस्ट के लिए लिंक दे रहा हूँ. http://jlsingh.jagranjunction.com/2012/02/19/%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80/

jlsingh के द्वारा
January 8, 2014

भारतीय रेल भारतीय लोग भाग -३ (आपका नाम क्या है?) इसे ०५ जनवरी को पोस्ट किया था पर उसमे कांटेस्ट नहीं लिखा था उसे पुन: अपडेट कर लिंक दे रहा हूँ. http://jlsingh.jagranjunction.com/2014/01/05/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97-3/

chitrakumar के द्वारा
January 8, 2014

शेरो-शायरी http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/08/शेर-ओ-शायरी/

nishamittal के द्वारा
January 8, 2014

साहित्य सरताज प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रविष्ठी……. आलेख .सामजिक विषय शादी कर दो सुधर जाएगा http://nishamittal.jagranjunction.com/2011/12/15/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE/?preview=true&preview_id=1582&preview_nonce=c15cf42ef3

लघुकथा – बार-बार बहाये जाने के बीच – http://spandan.jagranjunction.com/?p=683442

yamunapathak के द्वारा
January 8, 2014
nishamittal के द्वारा
January 8, 2014

साहित्य सरताज प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रविष्ठी आलेख ..  फैशन बनता बलात्कार (CONTEST )            http://nishamittal.jagranjunction.com/2012/12/18/%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F/?preview=true&preview_id=2381&preview_nonce=01e2d46b75

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 7, 2014
kumardineshmishra के द्वारा
January 7, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता- सलीका (प्रविष्टि) सलीका, हॉ सलीका ही तो सीखती हूं, हर रोज। अपनों और गैरों से स्कूल आते-जाते अनचाही घूरती एक्सरे सा  करती ऑखें सिखा जाती हैं सलीका। कल ही तो  पिताजी की झिडकी में  सलीका न सीखने की शिकायत और आज पहने कपडो को लेकर दादी मॉ की नसीहत सलीका, हॉ सलीका ही तो सीखती हूं, हर रोज। घर से निकलने को होने पर कभी दुपट्टा सही रखने तो कभी  सिलवटें ठीक न करने पर  भाभी- भइया की डॉट  और कभी पहनें कपडों को लेकर  पडोसियों की टिप्पणी सलीका, हॉ सलीका ही तो सीखती हूं, हर रोज। बातें ऐसे करो ऐसे चलो दौडो नहीं कूदो मत यहॉ बैठो वहॉ नहीं बंदिशों की बयार  सलीका, हॉ सलीका ही तो सीखती हूं, हर रोज।

Murari Adhikari के द्वारा
January 7, 2014

लघु-कथा: माँफी (कन्टेस्ट) मुरारि अधिकारी रामप्रसाद की शादी सीता से हो गई थी| फिर भी गांव की लड़कियों के पीछे भागता था| उस ने रामप्रिया नाम की एक लडकी से शारीरिक सम्बन्ध किया| लड़कीवालौं ने रामप्रिया की शादी रामप्रसाद से करा दिया| सीता बौखला गई| पर शादी तो हो चुकी थी| शुरु के दिनौं में सीता ने रामप्रिया को घर का काम सिखाया| रामप्रिया ने चूपचाप काम सिखा| फिर धीरेधीरे दोनो झगड़ने लगे| रामप्रसाद ने दोनो पत्नियों को मिलाके रखने की कोशीश की| पर झगडा बढता गया| हारकर उसने दोनो को अलग कर दिया| कुछ समय बाद दोनो औरतौं के एक एक बेटे हुए| एकदिन रामप्रसाद बिमार होगया और कुछ दिनौं में मर गया| रामप्रसाद की सेवा करते हुए सीता भी बिमार पड गई| बिमारी ने उसे जीने नहीं दिया| बेटे की भविष्य की चिन्ता ने उसे मरने नहीं दिया| गांववालौं ने कहा, अपने बच्चे के बारे में निश्चिन्त हुएबिना सीता नहीं मरेगी| रामप्रिया सौत की मौत चाहती थी| इसलिए वह मिल्ने चली गई| रामप्रिया बोली, “तुम बिमार हो| इसलिए हमें पुरानी बातें भुलाकर एक दुसरे की मदत करनी चाहिए| बोलो, मैं क्या कर सकती हूँ|” सीता कष्टसाथ बोली, “देखो बहन, जबतक बेटे के बारे में तसल्ली नहीं होता, मैं नहीं मरुंगी| अगर तुम मेरे बेटे का खयाल रखने का वचन दोगी तो मैं मर जाउंगी|” “तुम्हारे बेटे की देखभाल मैं नहीं करुंगी तो कौन करेगा? बोलो, क्या करना है?” सीता ने अपने ५ वर्ष के बेटे, सीतापुत्र, को पास बुलाया और उसका हात सौत के हात में रखकर कहा, “तुम मुझे वचन दो कि तुम इसे कभी नहीं पढ़ाओगी और जब यह बडा होगा तो इसे कभी घर से बाहर नहीं निकालोगी|” “मेरा वादा है|” सीता मरगई| रामप्रिया सीतापुत्र को अपने घर लेआई| उसने सोचा, सीता उस के बेटे की भलाई चाहती थी| उस ने ठीक उल्टा किया| सीतापुत्र को पढ़ाया और बडा होने पर घर से निकाल दिया| अपने बेटे, प्रियापुत्र, को नहीं पढ़ाया और बडा होने पर घर से बाहर नहीं भेजा| घर से निकाले जाने के बाद सीतापुत्र पढने शहर चला गया| काम करते करते पढा और अच्छी नोकरी पाया| कुछ दिनौं में उस ने छुट्टी ली| ढेर सामान और पैसे लेकर गांव गया| सबकुछ रामप्रिया और प्रियापुत्र को देकर उस ने कहा, “माँ, आप कितनी अच्छी हैं| मुझे पढ़ाया| शहर भेजा| धन्यवाद|” रामप्रिया ने उसे गले लगाया| माँफी मांगा| सीतापुत्र बोला, “माँ, मुझ से नहीं, प्रियापुत्र से माँफी मागिए| उसे भी पढ़ाना और शहर भेजना चाहिए था|”

जागरण Contest के द्वारा
January 7, 2014

साहित्य सरताज प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक सभी पाठकों को हम बताना चाहेंगे कि प्रतिभागियों की सुविधा के लिए हम यहां तीन मुख्य आलोचना वर्ग प्रतियोगिता के लिए वर्गीकृत कर रहे हैं जो इस प्रकार होंगे – (i) साहित्यिक, (ii) राजनीतिक और (iii) सामाजिक आलोचना। किंतु किसी भी प्रकार के धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत भावनाओं को आहत करने आलेख मान्य नहीं होंगे। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

sanjay kumar garg के द्वारा
January 7, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता- ‘लघु कथा’-”जवानी बनाम बुढ़ापा” (कांटेस्ट) http://sanjayutterpradesh.jagranjunction.com/2014/01/07/%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%AA/

January 6, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)- -खुलासा अपनी हसरत का ,है भाया कब मुखालिफ को [contest ] http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/06/%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%AF/

ranjanagupta के द्वारा
January 6, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता के रूप में सस्मरण “कपिला” …. http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2014/01/06/682147/

chitrakumar के द्वारा
January 6, 2014
sulochana के द्वारा
January 6, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता ”आज की सीता” http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/06/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

sulochana के द्वारा
January 6, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता ”सभ्यता” http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/06/%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

sulochana के द्वारा
January 6, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता ”नारी”http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/

कविता — दिल की धड़कन दिल से ये कहती है – कविता – Contest — http://spandan.jagranjunction.com/?p=681760

Ritu Gupta के द्वारा
January 5, 2014
aman kumar के द्वारा
January 5, 2014

आलोचना ….http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=681558

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 24, 2014

    अनुत्तरित प्रश्न – कविता ( कांटेस्ट )

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 5, 2014

http://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/05/तभी-तो-विस्फोट-करता-शब्द/ ( कविता)

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    January 24, 2014

    तभी तो विस्फोट करता है शब्द – कविता ( कांटेस्ट )

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 5, 2014

://acharyagunjan.jagranjunction.com/2014/01/05/तभी-तो-विस्फोट-करता-शब्द ( कविता )

Rajesh Dubey के द्वारा
January 5, 2014
ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014
vaidya surenderpal के द्वारा
January 4, 2014

कविता- गुनगुनायें- spbaidya.jagranjunction.com/2014/01/04/गुनगुनायें

khusbu के द्वारा
January 4, 2014

संपादक  महोदय को मेरा प्रणाम और नव वर्ष की शुभकामनांए महोदय हमे कैसे ज्ञात होगा कि हमारी प्रविष्टि शामिल हो गई ?

    जागरण Contest के द्वारा
    January 4, 2014

    आदरणीया, अपने ब्लॉग में कोई भी प्रविष्टि प्रकाशित करने के बाद उसका लिंक और जिस विधा में शामिल करना चाहती हैं उसके उल्लेख सहित इसी ब्लॉग के कमेंट बॉक्स में पेस्ट कर दें। आपकी प्रविष्टि प्रतियोगिता में शामिल मानी जाएगी। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

सौरभ कुमार मिश्र ’सतर्ष’ के द्वारा
January 4, 2014

“वो सचमुच बहुत अकेली है ” हाथो की चंद लकीरे है यादो की कुछ तस्वीरे है कुछ आपस की तकरीरे है कुछ बेवस सी तकदीरे है ।।1।। झूठी सी एक कहानी है सच्ची सी एक निशानी है एक पगली बहुत दीवानी है शायद वो खुद से अनजानी है ।।2।। प्यार भरी कुछ बाते है अपनो से बढकर नाते है काली काली कुछ राते है कुछ अनमिट सी मुलाकाते है ।।3।। कुछ खुशियों के फव्वारे है कुछ मर्यादा की दीवारे है दिखावटी कुछ गुब्बारे है हम ऊनसे बहुत किनारे है ।।4।। कुछ कडिया उलझी उलझी है कुछ लडिया सुलझी सुलझी है अब भी बात नहीं समझी कैसी उसकी नासमझी है ।।5।। कष्टों को उसने झेली है झूठी सब सखी सहेली है अनबुझ सी एक पहेली है वो सचमुच बहुत अकेली है वो सचमुच बहुत अकेली है ।।6।। एक गुमनाम ग़ज़ल सी है यादो के शीश महल सी है कीचड़ के बीच कमल सी है सचमुच वो श्वेत धवल सी है ।।7।। ना जाने कैसी दुरी है मेरी भी कुछ मजबूरी है शायद वो बहुत जरुरी है बिन उसके बात न पूरी है ।।8।। बिन उसके सबकुछ खाली है जीवन संगीत भी गाली है नहीं हकीकत कुछ भी “सतर्ष ” ये बाते सपनों वाली है ये बाते सपनों वाली है ………….।।9।। —सौरभ कुमार मिश्र “सतर्ष “

सौरभ कुमार मिश्र ’सतर्ष’ के द्वारा
January 4, 2014

“कोई विवाद नही” कसम तुम्हारी कसक चाह की, छोड़े एकपल साथ नही| खोकर ख़ुद को खुद्दार हुआ, मुझको अब कुछ भी ज्ञात नही| तुझको सबसे बाहर समझा, पर शायद तू भी अपवाद नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||1| बिन याद किए तुझको सजनी, बीती है कोई रात नही| पर कैसे समझेगी ये बाते, है तुझमें वो जज़्बात नही| गम में नम है नैना मेरी, जीवन में कुछ अह्लाद नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||2| यादों में तेरे कैद प्रिये, एकपल को भी आज़ाद नही| जिन्दा हूँ पर जीवन में मेरे, कुछ कम प्रबल आघात नही| तू मुलप्रति मेरी सजनी, किसी पुस्तक कि अनुवाद नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||3| तू हो जिस पहलु में सजनी, हो कोई वहा फसाद नही| रहे सादा यादों में तू, इसमे उसका कुछ हाथ नही| है सत्य-वेदना जीवन कि, कोई फिल्मी सम्वाद नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||4|| है सोच कि तू अन्तिम सीमा, कुछ भी अब तेरे बाद नही| तू जाम मेरे जीवन कि है, बिन तेरे कोई स्वाद नही| हर श्वास में तेरा वास प्रिये, बिन तेरे अब कोई बात नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||5| ल गई सारी बातें , बस तेरी कहानी याद रही| हो खुशियों कि सौगाते, अपनी कुछ और मुराद नही| आ जां घर लौट के वो सजनी, साजन आबाद नही| अब कोई विवाद नही तुझसे, कोई फरियाद नही ………||6| सौरभ कुमार मिश्र ’सतर्ष’

सौरभ कुमार मिश्र ’सतर्ष’ के द्वारा
January 4, 2014

“आधी आबादी” शक्ति आज है शक्तिहीन, नर दुष्कृत्यो से हुई मलीन, हालत उसकी है दीन-हीन, प्यासी जैसे जल बीच मीन, नारी को उसका असली चेहरा दिखलाने निकला हुँ। आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।1। भ्रुण से ही विपदा है तुझपर, जन्मी तो फिर माँ बेटी पर, कहते है बेटी दुख का घर, कुँठित सदियो से तेरा स्वर, द्रौपदी को अब दुःशासन से मै मुक्त कराने निकला हुँ। आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।2। देवी का पूजे चरण-कमल, फिर क्यो नारी का नयन सजल, सहमी सहमी सी है हरपल, समझे उसको अबला निर्बल, इन पाखण्डी पुरुषो की सच्चाई दिखलाने निकला हुँ। आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।3। तुम वीर हो जैसे लक्ष्मीबाई, सदा ममता और त्याग ही सिखलाई, क्या धरती, क्या हिम की चोटी… अंबर मे भी परचम फहराई, नारी को उसका स्वर्णिम इतिहास बताने निकाला हू| आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।4। कभी अबला, कभी शक्तिसार, कभी स्वर्गमयी, कभी नरकद्वार, कभी सुखसागर, कभी दुख अपार, कभी पीडिता, कभी वंदनवार, नारी को इन द्वन्दो से उन्मुक्त कराने निकला हू| आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।5। तुम हो भगिनी, भगवती भी हो, तुम हो सीता और सती भी हो, तुम हो शक्ति, सरस्वती भी हो, तुम हो अंबर, धरती भी हो, नारी को उसका असली पहचान बताने निकला हू| आज मै आधी आबादी का दुखडा गाने निकला हुँ।6। सौरभ कुमार मिश्रा ‘सतर्ष’

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal) – प्रविष्टि (इश्क है या कोई बिमारी है) लिंक: http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680970

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal) - प्रविष्टि (खूबसूरत हँसी परी होगी) लिंक: http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680965

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – प्रविष्टि (राह का काँटा हुआ तब भी हटाया जाऊँगा) लिंक : http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680962

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – प्रविष्टि (मौत के साथ आशिकी होगी) लिंक : http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680954

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल - प्रविष्टि (ब्लॉग पोस्ट) लिंक : http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680940

January 4, 2014

ग़ज़ल – प्रविष्टि (ग़ज़ल – अनसुनी बात करके रवाना हुआ) लिंक: http://revert2arun.jagranjunction.com/?p=680940

RAHUL SANMOTRA के द्वारा
January 4, 2014

Mujh Ko Baatein Kab Aati Hain ? Main To Bus Khamosh Sa Shaair Ulfat Chahat Ke Rango Se Dil Ki Khali Tasveero Me Koi Mohabbat Likh Deta Hoon … Aur Kabhi Deewar Se Lagkar Koi Mohabbat Ro Deta Hoon … Aur Kabhi Aankho Aankho Mein Saari Baatein Keh Jata Hoon …. Main To Ek Khamosh Sa Shaair Mujhko Baatein Kab Aati Hain ??? Mujh Ko Baatein Gar Aati To Tum Kiya Mujh Ko Chhor Kar Jaati ??? Mere Sapne Tod Kar Jaati ??? Kiya Meri Aankho Mein Dukh Ke Itne Aansoo Dekh Sakti Thi ??? Mera Kul Sarmaya Tha Jo Kiya Mujhse Woh Le Sakti Thi ??? Mujh Ko Baatein Gar Aati To Main Bhi Tumse Woh Sab Kehta Jo Tum Sunne Ki Khwahish Mein Saare Raaste Bhool Aayi Ho Saare Rishte Bhool Aayi Ho Main Thera Khamosh Sa Shaair Mujh Ko Baatein Gar Aati To Tum Bhi Mere Khwab Sajaati Yoon Na Tanha Chhor Kar Jaati Kaash ! Mujhe Bhi Baatein Aati .. Mr.RAHUL SANMOTRA STATE/ J&k distt jammu mob no 9018185430 rahulsanmotra5233@gmail.com

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ शेर ओ शायरी “अजनबी” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/12/01/%e0%a4%85%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

    RAHUL SANMOTRA के द्वारा
    January 4, 2014

    Ham aapke dil me rahte h Sare dard aapke sahte h Koi hamse pahle wish na kar de aapko Isliye pHle hppy new year kahate ha Wish you a very HaPpY New YeaR 2014 Beete Saal Ko Wida Es Kadar Karte Hain Zo Nhi Kiya Ab tak Wo Bhi Kar Guzrate Hain Nya Saal aane Ki Khushiyaan To Sab Manaate Hain,, Chalo Hum.. Es Baar Beete Saal Ki Yaado Ka Jashn Manaate Hain..♥♥ Fool Khilenge Gulshan mein Tab Khubsurati Nazar Aayegi Beete Saal ki Khatti Meethi Yaade Hi Bas Sang Rah Jayengi Aao Jashan Manate Hai Nye Saal Ka Saath Milkar,, Nye Saal ki Pahli Subah hi Khushiyaan Jo Anginat Layegi..♥♥ Wish you a very happy new year 2014 to my all frnds! rahul sanmotra con no 9018185430 rahulsanmotra5233@gmail.com

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ शेर ओ शायरी “अजनबी”

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “मन कि पुकार” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/09/26/%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “मन कि पुकार”

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “झोंपड़ी” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/10/26/%e0%a4%9d%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

ranjanagupta के द्वारा
January 4, 2014

http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/11/20/%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/ ‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “मन कि छाया”

January 4, 2014
January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)- न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार .-कांटेस्ट http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/03/%E0%A4%A8-%E0%A4%9B%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87/

January 4, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)-http://shalinikaushik.jagranjunction.com/2014/01/03/%E0%A4%A8-%E0%A4%9B%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87/

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 3, 2014

शेर ओ शायरी / गज़ल – (Sher O Shayari / Ghazal)-शहीदों के कफ़न तक बेच खाते हैं कई बुझदिल ![CONTEST ] http://shikhakaushik.jagranjunction.com/2014/01/03/%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9A-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87/

sahedev singh के द्वारा
January 3, 2014

Kya mai esme bhag le sakta hu? Kya mujhe jagran junction me ragistered hona jaruri hai??

    जागरण Contest के द्वारा
    January 4, 2014

    आदरणीय सहदेव जी, आप इस मंच पर अपने ब्लॉग का पंजीकरण करवा लें जिसके लिए सबसे ऊपर दाहिनी ओर दिए गए “रजिस्टर” बटन पर क्लिक करें। फिर प्रतियोगिता की शर्तों के अनुसार दी गई विधाओं में ब्लॉग पोस्ट लिख कर उनके लिंक इस ब्लॉग के कमेंट बॉक्स में पेस्ट कर दें। धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

sulochana के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “कलुआ”http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%86/

sulochana के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ ग़ज़ल “ख्वाब”http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ac/

sulochana के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “औरतें”http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%82/

sulochana के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “झुनिया” http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/

sulochana के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता ”गुड़िया”http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/

priya के द्वारा
January 3, 2014

जागरण जंक्शन मंच का यह प्रयास काफी सहरानीए है। इसके जरिए साहित्य से जुड़े लोगों को अपना लेखन शैली दिखाने का मौका मिलेगा।

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “लड़कियां” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/10/02/617368/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “हादसों का शहर” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/09/23/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “खौफ” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/09/28/613725/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “तुम” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/10/21/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ kavita ”बुद्ध का गृह त्याग” http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/10/31/636645/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ kavita suno mai deep hun http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/11/02/638556/

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/11/02/638556/  ‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ kavita

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

http://ranjanagupta.jagranjunction.com/wp-admin/post.php?action=edit&post=617368 ‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ kavita

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’  href=”http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/11/10/प्रश्न-कविता”

ranjanagupta के द्वारा
January 3, 2014

‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ http://ranjanagupta.jagranjunction.com/2013/11/10/प्रश्न-कविता/

January 2, 2014

कविता  http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/02/अभी-तो-फकत-एक-…रा-पिटा-है-con/

aman kumar के द्वारा
January 2, 2014

http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=६७९५८४ संस्मरण – (Reminiscence)          सफ़दर ! अभी मत जाना भाई !कॉन्टेस्ट

Prasneet Yadav के द्वारा
January 2, 2014

कविता- ये आवाज़ हमारी ताकत है।http://prasneetyadav.jagranjunction.com/2014/01/02/%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A5%9B-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9/

January 1, 2014

शेर-ओ-शायरी http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/01/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B0-contest/

January 1, 2014

शेर-ओ-शायरी - http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/01/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B0-contest/

January 1, 2014

शेर-ओ-शायरी - http://chitrakumar.jagranjunction.com/2014/01/01/मेरे-कुछ-शेर-contest/

pragati के द्वारा
January 1, 2014
sanjay kumar garg के द्वारा
December 29, 2013

संपादक महोदय सादर नमन! बढ़िया कदम!

December 27, 2013

भूल सुधार महोदय गलत बटन दबने के कारण रचनात्मक के स्थान पर रचनकत्मक हो गया है । त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ । सधन्यवाद

    Gopesh Kumar के द्वारा
    January 12, 2014

    I am very thankfull to you. This is a best oppurtunity for us.

December 27, 2013

श्रीमानजी इस रचनकत्मक कदम के लिए आपको धन्यवाद ।

    sulochana के द्वारा
    January 3, 2014

    ‘साहित्य सरताज प्रतियोगिता’ कविता “झुनिया” http://paakhi.jagranjunction.com/2014/01/03/%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/


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